गायत्रीं मंत्र की महिमा की कहानी

0
100

गायत्रीं मंत्र की महिमा की कहानी

कई साल पहले, जब राजा महाराजवों का राज चलता था तब देव दत्त नाम का एक ब्राह्मण रहता था.  वोह बहुत ही सादारण, इस्वर का धयान और गायत्री मंत्र के जाप में समय बिताता था.  इस से आलावा वोह जनेऊ बनानेमे भी माहिर था और जनयु बनाते वक्त वोह गायत्री मंत्र उच्चारण में लीन रहा करता था.   एक दिन उस से बिलकुल अद्बुत जनेऊ बनगया था और वोह उस जनयु को वहां का राजा को बेट करना चाहता था.  तोह वोह राजा के समूह में पहुँच कर उस अद्बुत जनेऊ को महाराज को तोफा में दिया.  राजा ने प्रति उपकार में ब्राह्मण को 100 सोने का सिक्का देने का आदेश किया. पर साथ में भैठी महारानी को 100 सोने के सिक्का ज्यादा लगा तो महाराज को बोला की आप ऐसे ही बाटथे रहेंगे तो हम कंगाल होजाएंगे. 

गायत्रीं मंत्र का महिमा की कहानी
गायत्रीं मंत्र का महिमा की कहानी

गायत्री मंत्र का चमत्कार

यह सुनकर महाराज ने ब्राह्मण को उस जनेऊ का बराबर का सोने देनेका प्रस्ताबित किया.  ब्राह्मण कोई लालाज् के बिना इस प्रस्थाबित को मान लिया.महाराज के आग्या अनुसार वहां एक तराजू लगाया गया और एक तरफ वोह जेनेयु और दुसरे तरफ कुछ सोने का सोने का सिक्का रखा गया.  लेकिन वोह बराबर नहीं हुवा.  धिरे धिरे महाराज के खजाने का सारे सम्पति तराजू में रकने के बहजुत तराजू बराबर नहीं हुवा.  महाराज ने कुछ गाय, हाती, जमीन, और गाँव को रखने के बात भी तराजू बराबर नहीं हुआ.  महाराज संकट में आगये और महा मंत्री की ओर देखने लगे.  महा मंत्री उस नजर का मतलब जान गए की “मै तो बीवी की बातों में आकर पंगे में फस गए; आप कुछ तंत्र करके मुझे इस मुसीबत से बचावो”.

गायत्रीं मंत्र का महिमा की कहानी
गायत्रीं मंत्र का महिमा की कहानी

गायत्री मंत्र पर लीन होना जरुरी है

तो महा मंत्री ने सभा का बंध होने का ऐलान किया और ब्राह्मण को दुसरे दिन एक नए जनेऊ के साथ फिर से आने की सुजाव प्रस्ताबित किया.   उसके बात ब्राह्मण घर पहुंचा तो उस के बीवी ने पुचा की महाराज ने उसको क्या बेट किया.  ब्राह्मण सारे कहानी सुनाने पर उसका बीवी ने ब्राह्मण को तुरंत दूसरा श्रेष्ट जनेऊ बनाने की सुजाव दिया.  ब्राह्मण जब स्वभाविक तरीके से जनेऊ बनाता था तब वोह गायत्री मंत्र का उच्चारण करता था पर इस समय उस को गायत्री मंत्र पे मन नहीं लगा.  फिर भी, वोह ऐसी तैसी करके जनेऊ बना ही लिया.

दुसरे दिन वोह जब राजपाट पहुंचा तो वहां बहुत बीड अस्चर्या चहित कड़े हुवे पाया.  फिर से तराजू में एक तरफ जनेऊ और दूसरी तरफ 100 सोने के सिक्का रखा गया लेकिन इस बार सोने बारी पड़ा.  तोडा तोडा करके सोना के सिक्का तराजू से निकला गया आकिर 2 सोने के सिक्के के सात तराजू बराबर हुआ.

गायत्रीं मंत्र का महिमा की कहानी
गायत्रीं मंत्र का महिमा की कहानी

महाराज को यह बहूत आश्चर्य लगा और वोह महा मंत्री से इसके कारण पुचा.  महा मंत्री बोला की पहले ब्राह्मण जनयु बनाते वक्थ उसका मन गायत्री मंत्र में लीन हो जाता था.  सिर्फ गायत्री मंत्र की महिमा से पहले जनेऊ का वोजन किया तो वोह बारी पडता था.  लेकिन जब ब्राह्मण दुसरे जनेऊ बनाया था तब ब्राह्मण का मन गायत्री मंत्र पर लीन नहीं था.  ब्राह्मण के मन में लालच और कल क्या होगा का चिंता था इसलिए वोह 2 सिक्के के बराबर होगया.  

धयान पूर्वक ग्रहण करने या सुनने का फल

गायत्री मंत्र का महिमा अपरं पार है.  गायत्री मंत्र का उच्चारण, गायत्री मंत्र उच्चारण करने वाले की स्वांस को नियंत्रण करता है. जब स्वांस नियंत्रण हो वहां सब कुछ संभव है.  इसलिए गायत्री मंत्र उच्चारण के समय हमें गायत्री मंत्र का पूरा धयान पूर्वक ग्रहण करने से ही गायत्री मंत्र उच्चारण करने का या सुन ने का फल मिलेगा.

अदिक जानकारी के लिए:   गायत्री मंत्र

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here