धन प्राप्ति के सामान्य टोटके

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भारत के कस्बो में अक्सर एक बात होती है की “देखो दुकान खुले 2 महिने नहीं हुए ‘वोह’ घडी ले लिया| जो लगातार मेहनत नहीं कर सकते है उनकी यही भाषा होती है ! वे यह नहीं देखते हैं की ‘वोह’ दिन में 18 घंटे अपने दुकान में बिताता है|  पैसा कमाना सब के बस की बात है लेकिन सिर्फ समझ की बात है| कोई कहता है की ‘पाप’ की कमाई हमें नहीं चाहिए| कोई समझता है की ‘पाप’ और ‘पुण्य’ कुछ नहीं होता| सच में कहा जाये तो यह सब हमारे समझ की बात है| और इस पोस्ट में हम जानेगे की धन प्राप्ति के सामान्य टोटके क्या हो सकते है | यह पोस्ट सबसे हटके है इसमें धन प्राप्ति के तरीके नहीं बताये गए बल्कि धन को प्राप्त करने के क्या टोटके हो सकते है वो बताया गया है तो चलिए आगे चलते है

धर्म की नजरों में धन प्राप्ति के सामान्य टोटके

धन प्राप्ति के सामान्य टोटके
The words How to Make Money on a chalkboard
धन प्राप्ति के सामान्य टोटके

धरम की नजरों में ‘पाप’ और ‘पुण्य’ एक समान है, चाहे आप ‘पाप’ कमाए या ‘पुण्य’, दोनों अवस्था में आप को पूर्व जन्म का फल भुगतने के लिए लेना वो फल लेना ही पड़ेगा| तो समझदारी की बात इस में है की हाथी की पाव के निचे से धीरे से पूँछ निकाल लें|

क्या पैसा कमाने के लिए दुसरे को धोका देना पड़ेगा? धन प्राप्ति के सामान्य टोटके

बिलकुल यह बात भी नहीं है| हम सब ने, क्या सही या क्या गलत है, ये सब बाते अपने नजरिये से सीखी हैं|  यह नजरिया हर एक इंसान में अलग अलग होता है| जो आप सही समझ रहें हैं वोह दुसरे की नज़र में गलत हो सकता है और आप जो गलत समझ रहें हैं वोह दुसरे की नज़र में सही हो सकता है| सिर्फ इस नजरिये से दुनिया चल रही है| आप की सोच में बड़ों का आदर करना है| पर अगर आप का ही लड़का/लड़की/ या पोता/पोती आपकी इज्जत नहीं करता तो आप उसको नज़र अंदाज करते हैं ना? क्यों? क्या बच्चो के प्यार के लिए आपका दिल आपको को मजबूर कर रहा है?  ऐसा आप कितने दिन तक समझोता कर सक्रते है? बस यही नजरिया और समझदारी है की आप क्या ‘पाप’ और ‘पुण्य’ के नजर से देखते हैं? नहीं तो क्यों?

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कुदरत की नज़र से धन प्राप्ति के सामान्य टोटके

कुदरत की नज़र से अगर देका जाये तो कुदरत की भाषा सिर्फ ये ही है जो माना जाना मुहावरा भी है “जोह भोगोगे गे वाही काटोगे”| यह हम सब अपने नज़र की सामने देके हैं की इस में कहीं भी गलत स्तभित नहीं हुवा|  तो हमारे कर्त्तव्य इतना ही है की हम अपना नजरिया में अपने आप को समालें|  इस जगह में जब हम संजोता करते हैं उसी पल हम अपना संतुलन को बैट ते हैं, और दुनिया बर की ‘टेंशन’ हने घेर लेता है|  इस ‘टेंशन’ को कुदरत की इशारा समजो और उसमे से निकल जावो|  यहाँ पर इंसान की इर्षा आ जा ता है! यह भी कुदरत का ही दें है| बस इस कुदरत का इशारा जो समज पाता है वो ही कामयाब है|  सिर्फ वोह ही कामयाब है|

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