हमें स्वयं पर दूसरों के प्रभाव को देखने का तरीका बदलना चाहिए

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हमें स्वयं पर दूसरों के प्रभाव को देखने का तरीका बदलना चाहिए

हमें स्वयं पर दूसरों के प्रभाव को देखने का तरीका बदलना चाहिए : किसी अप्रिय घटना के बाद हम देर तक परेशान रहते हैं और बदला लेने की तैयारी में जुट जाते हैं|  इस दौरान अधिकांश नकारात्मक विचार आते हैं|  एक बेस्ट सेलर किताब के लेखक बेन डायर का कहना है की जीवन में ज्यादातर दरारें स्थिति को आत्मसात न करने के कारण पड़ती है|  लोगों को पानी की तरह पारदर्शी और प्रत्येक स्थिति में ढल जाने की प्रवृति  रखनी चाहिए|  रुका हुआ पानी गंदा हो जाता है, उसी तरह किसी कडवे अनुभव का प्रभाव देर तक मन में रहकर वर्तमान को दुखद बना देता है| जरुरी है कहीं पर माफ़ कर दें और कहीं पर माफ़ी मांग लें|

हमें स्वयं पर दूसरों के प्रभाव को देखने का तरीका बदलना चाहिए
हमें स्वयं पर दूसरों के प्रभाव को देखने का तरीका बदलना चाहिए

यह तो सत्य है की दुःख देने वाले को माफ़ करना मुश्किल है, प्रतिशोध की भावना रह-रह कर उमडती है, पर जीवन के सकारात्मक पहलुओं से अच्छे परिवर्तन पर ध्यान देना चाहिए|  सबके साथ मिलकर चलना नयी संभावनाओं को जन्म देता है, जो आत्मकेंद्रित न होकर वसुधैव कुटुम्बकम की तरफ ले जाता है और सच तो यह भी है की प्यार के बदले प्यार मिलता है|

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व्यक्ति और स्थितियों बदलती रहती है

किसी अप्रिय घटना का प्रत्युत्तर दयालुता से देने का खतरा हम उठालें तो कड़वाहट तत्क्षण ख़तम हो जाती है|  हानि पहुँचाने वाले सभी विचारों से खुद को दूर कर देखें तो हम शत्रु भाव से भी मुक्त हो जायेंगे| यदि लगता है की चीजों सिर्फ हमें दुखी करने के लिए की जा रही है तो भी उसे व्यक्तिगत न मान कर छोड़ देना चाहिए|  व्यक्ति और स्थितियों बदलती रहती है|  नकारात्मक लोगों को अपने अनुकूल बनाना मुशिकल है, पर उन तक पहुंचना आसान है जो हमारे अनुकूल है|

 व्यक्ति और स्थितियों बदलती रहती है
व्यक्ति और स्थितियों बदलती रहती है

अगर कभी लगे की दुनिया में सब लोग बुरे और प्रतिकूल विचारों वाले ही मिल रहे हैं तो एक बार अपने अन्दर भी झांक कर देख लेना चाहिए|  हो सकता है अपना ही व्यवहार ऐसा हो जो सबको दुखी कर रहा हो|  सब के साथ सम्मान से पेश आना चाहिए|  हमें स्वयं पर दूसरों के प्रभाव को देखने का तरीका बदलना होगा, तब कई अच्छे पक्ष सामने आएंगे|  दूसरों की सोच बदलने की कोशिश से अच्छा है, अपनी ही सोच को परिष्कृत किया जाये|  लोगों को समझने का दायरा बढ़ाना होगा|  इससे कोई मतभेद हुए बगैर विभिन्न स्वभाव वाले लोग के साथ सामंजस्य स्थापित करने में सुविधा होगी|

 

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