एक आदमी का गलती दुसरे को गलती क्यों नहीं लगता है

0
104

एक आदमी का गलती दुसरे को गलती क्यों नहीं लगता है

हम मनुष्यों का विचार एक जैसा नही होता| अगर एक घर में चार लोग रह रहें हो उन सब के लिए वातावरण तो एक जैसा ही है| फिर भी, उनमे से एक व्यक्ति को जो गलत या पाप लगता है वो दुसरे व्यक्ति के लिए पाप या गलत नहीं लकता|  हमें कूद भी जो सही लकता था वो समय बदलते एक दिन वो सही नहीं लगता| हमारे भीतर सही गलत का निर्णय कहाँ से आता है?  चलो देख ते हैं की एक आदमी की गलती दुसरे के लिए गलती क्यों नहीं लगता|  हम सारे अपने छोटे पन में अपने माँ-बाप से सही और गलत का पाट पड़ते हैं फिर भी हम उस पाट को स्वीकार नहीं करते| कुछ लोग करते भी होंगे फिर भी हम सब क्यों नहीं करते|

एक आदमी का गलती दुसरे को गलती क्यों नहीं लकता है
एक आदमी का गलती दुसरे को गलती क्यों नहीं लकता है

चेतन और अवचेतन मन

कुदरत ने हमें एक दिमाग दिया है पर उस में दो तरह का अनुबुधि होता है|  उस में एक विबाग का नाम है चेतन मन और दूसरा अवचेतन मन|  अवचेतन मन उन कार्यों में ही लगा रहता है जिस से सरीर का जरुरी तत्त्व अपने काम सही से करें यानी खून का दौरा, पाचन तंत्र का काम इत्यादि|  चेतन मन हमारे पांचों इन्द्रियों से जो सन्देश मिलता है उस से काम करता है|

और पढ़ें:  तनाव से छुटकारा पाने के लिए आने-जाने श्वास पर ध्यान केंद्रीत करें

चेतन और अवचेतन मन
चेतन और अवचेतन मन

अवचेतन मन पांचो इंद्रियों की संकेत और उस से जुडी भावनाओं से सही और गलत का अनुमान लगा लेता है

पर अवचेतन मन आपका इंद्रियों का सन्देश और उस से जुडी आपका भावनावों से अंदाज लगा लेता है उसी से वोह सही और गलत का फैसला करता है| उदहारण के लिए आपका छोटेपन में आप का पापा कहते हैं की दुप में मत जावो जमीन की घर्मी से आप का पैर जल जायेगा| पर उस समय आप का पैर घिला था इसलिए आप का पैर नहीं जला तो आपका मन में कोई भावना भी नहीं जगा इस कारण आपका अवचेतन मन इस बात को सही नहीं माना|  अगर आपका पैर गिला नहीं रहा और आपका पैर सचमुच जल गया तो उसके साथ कुछ भावना भी जरुर जागा होगा तो उस समय आप का पिता का सुजाव सही होगया और इस घटना को आप का अवचेतन मन सही माना|  इसी प्रकार अवचेतन मन पांचो इंद्रियों की संकेत और उस से जुडी भावनाओं से सही और गलत का अनुमान लगा लेता है| फिर वही आपका स्वबाव बन जा था है|

अवचेतन मन पांचो इंद्रियों की संकेत और उस से जुडी भावनाओं से सही और गलत का अनुमान लगा लेता है
अवचेतन मन पांचो इंद्रियों की संकेत और उस से जुडी भावनाओं से सही और गलत का अनुमान लगा लेता है

यही कारण है की एक आदमी को जो सही लगता है वो दुसरे आदमी के लिए सही नहीं लगता|

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here